North Sentinel Island in Hindi | नार्थ सेंटिनल द्वीप की पूरी कहानी

North Sentinel Island

North Sentinel Island | नार्थ सेंटिनल द्वीप

North Sentinel Island(नार्थ सेंटिनल द्वीप) भारत के अंडमान निकोबार द्वीप का ही एक हिस्सा है North sentinel island सिर्फ 60 स्क्वायर फीट में फैला है और पूरा आइसलैंड जंगल से घेरा हुआ है

अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में टोटल 572 आइलैंड है जिसमे 38 आइसलैंड पर लोग रहते है और सिर्फ 12 आइसलैंड ही टूरिस्ट के लिए ओपन है।

यहां पर रहने वाले लोगो को नॉर्थ सेंटीनेली कहा जाता है। लेकिन यह हमने नाम दिया है। और वह लोग अपने आप को क्या कहते वह हम नही जानते।

नॉर्थ सेंटीनेली (नार्थ सेंटिनल द्वीप पर रहने वाले लोग) की कहानी

North Sentinel Island
North Sentinel Island image from google earth

ऐसा कहा जाता है की आज से से करीब 70,000 साल पहले कुछ लोग अफ्रीका से बाहर माइग्रेट किए थे।

इसे आउट ऑफ अफ्रीका थ्योरी कहा जाता है, जो पहले मॉडल ह्यूमन बीन्‍स वह अफ्रीका से आए और ये लोग जो आज के दिन सेंट लुईस आयलैंड पर मौजूद हैं।

यह वही लोग है जो अफ्रीका से माइग्रेट हुए थे लेकिन समय के साथ साथ ज्यादातर लोग सभी लोग के साथ मिल गए और सिर्फ एक यही आइलैंड के लोग दूसरे इंसानों से दूर रहे।

यह लोग दूसरे लोग से इस लिए नही मिक्स हो पाए क्यों की यह लोग एक आइसलैंड पर रहते थे और कोई जमीन कनेक्शन भी था।

ऐसा कहा जाता है की यह लोग करीब 10,000 से लेकर 30,000 साल पहले ये लोग इस आईलैंड पर आए थे और तब से ये आइसोलेटेड रहे हैं बाकी दुनिया से।

आपको बता दे की 12,000 साल पहले खेती शुरू हुई थी लेकिन इस आइसलैंड के लोगो को अभी तक भी खेती करना नही आता। और इसे पता ही नही की खेती क्या होती है।

यह लोग आखिरी स्टोन एज ट्राइब यानी ऐसे लोग जो आज के दिन भी स्टोन एज के जमाने के लोगों की तरह रहते हैं।

आखिरी स्टोन एज ट्राइब

स्टोन एज के लोग इसे कहते है जो किसी चीज को उगा के या पका के नही खाते बल्कि उन्हें जो पेड़ पौधे से मिल जाता है वही खाते है। इनका खोराक मछली ओर पेड़ पौधे से मिलने वाले फल ही है

नार्थ सेंटिनल द्वीप के बारेमे कब पता चल?

आपको बता दे की इस आइसलैंड के साथ भारत सरकार ने कई बार संपर्क करने की कोशिश की है लेकिन वह के लोग सिर्फ हमला ही करते है। वह दूसरी दुनिया से अलग ही रहना चाहते है।

नार्थ सेंटिनल द्वीप के बारेमे पहली बार 1771 में पता चला था जब ईस्ट इंडिया कंपनी का जहाज इस आइसलैंड के पास से गुजरता है और इन्हें इस आइसलैंड से रोशनी नजर आती है।

इस आइसलैंड का दूसरा रिकॉर्ड है साल 1867 में जब एक इंडियन शीप जो 100 लोगो को लेकर वहा से गुजरती है लेकिन कुछ समुद्री आफत के कारण वह शिप इस आइसलैंड के साथ टकरा जाता है। जो लोग बचे थे उस पर इस आइसलैंड के लोगो ने हमला किया। लेकिन कुछ भी करके शिप में मौजूद लोग वहा से भाग जाते है।

यह पहला केस था जब पता चला की इस आइसलैंड के लोग दूसरे लोग को वहा से दूर रखना चाहते है

साल 1880 में पहली बार एक अंग्रेज ने इस आइसलैंड के लोगो के साथ संपर्क करने की कोशिश की थी। लेकिक उन लोगो ने इन पर भी हमला करा और इसे आइसलैंड से दूर कर दिया।

भारत की पहली कोशिश

आजादी के बाद भारत सरकार ने कई बार इस आइसलैंड के साथ संपर्क करने की कोशिश की।

भारत सरकार ने पहली बार साल 1967 में त्रिलोकनाथ पंडित के साथ 20 लोगो की टीम के साथ इस आइसलैंड पर भेजा था। इस 20 लोगो में साइंटिस्ट, डॉक्टर और आर्मी फोर्स के जवान भी शामिल थे।

जब वह आइसलैंड पहुंचे तो उन्होंने वहा के लोगो के पैरो के निशान देखे और उसे फॉलो किया। लेकिन 1 किलोमीटर तक पैरो के निशान को फॉलो करने पर भी उन्हें कोई लोग नजर नहीं आए। और वह पूरी टीम वापिस लौट गई।

त्रिलोकनाथ पंडित पहले मानव विज्ञानी बने जो इस आइसलैंड कर गए हो।

नॉर्थ सेंटीनेली को पहली बार कैमरा मे कैप्चर किया गया

साल 1974 में एक फिल्म मेकर इस आइसलैंड पर गए और एक डॉक्यूमेंट्री बनाई। इस टीम के साथ भी त्रिलोकनाथ पंडित मौजूद थे और आर्म फोर्स भी।

इस बार वह तौफे के तौर पर नारियल और एक जिंदा सुवर को छोड़ा।

नारियल और सुवर को इस आइसलैंड पर छोड़कर वह इन लोगो को देखने के लिए थोड़े पीछे आए।

थोड़े समय के बाद कुछ लोग आए और धनुष बाण से हमला करने लगे। उन्होंने सुवर को भी मार डाला और वहा रेत में दफना दिया।

यह पहली बार था की नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड ले लोगो को पहली बार कैमरा में कैप्चर किया।

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त्रिलोकनाथ पंडित ने कई बार इस लोगो से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन नतीजा वह था की वह लोग इन कर हमला कर देते थे।

1981 में एक शिप बांग्लादेश से ऑस्ट्रेलिया जा रही थी लेकिन तूफान को वजह से वह नॉर्थ सेंटिनल आइसलैंड पर जा कर टकरा गई। शिप को आइलैंड पर देखते ही वहा के लोग बाहर आए और शिप पर हमला करने लगे। शिप में फसे हुए लोग कैसे भी करके वापिस लौट गए।

जो शिप वहा फसी थी उसे आप आज के समय में भी गूगल मैप में देख सकते है।

Primros ship
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इस तस्वीर को गूगल मैप पर देखने के लिए यहां क्लिक करे

पहली बार उस लोगो के साथ फ्रेंडली संपर्क

1991 में पहली बार उस लोगो के साथ फ्रेंडली संपर्क हो पाया जब कोई वहा गया हो और वहा के लोग में हमला नही किया हो।

इस समय त्रिलोकनाथ पंडित नही बल्कि मधुमाला चट्टोपाध्याय गई थी।

मधुमाला चट्टोपाध्याय अपनी छोटी टीम के साथ बिना कोई हथियार के साथ गई थी।

जब वह उस आइसलैंड पर पहुंचे तो वहा के लोगो ने इन पर हमला नही किया और मधुबाला के द्वारा दिए गए नारियल को उन्होंने स्वीकार किया।

मधुमाला चट्टोपाध्याय की टीम उन्हें नारियल देकर वापिस लौट गई और दूसरे दिन वापिस उनके लिए नारियल लेकर गई। लेकिन दूर से देखा तो इस आइसलैंड पर एक आदमी धनुष लेकर हमला करने के लिए तैयार था। लेकिन जब उन्होंने मधुबाला को देखा तो वहा से दूसरे लोग भी बाहर आए और हमला करने से मना कर दिया।

लेकिन यह आखरी बार था जब उन्होंने दूसरे लोग की गिफ्ट को स्वीकार किया हो। क्यों को उसके बाद वह पहले जैसे ही हो गए और फिर से हमला करना शुरू कर दिया

अभी तक किसी को नही पता चला की आखिर क्यों वह कुछ समय के लिए फ्रेंडली हो गए और फिर से जैसे थे वैसे बन गए। 

भारत सरकार ने इस आइलैंड पर जाने पर पाबंधी लगा दी

लगातार संपर्क करने बाद जब इन लोगो के साथ संपर्क नही बना तो आखिर 1997 में भारत सरकार ने इस आइसलैंड पर जाने पर बैन लगा दिया।

भारत सरकार ने सोचा कि क्यों इन लोगो को बार बार तंग करे। इन्हे अपनी जिंदगी जीने दो और खुश रहने दो।

भारत सरकार ने निर्णय लिया की वह अब इस आइसलैंड पर किसी को नही जाने देंगे। और एक eyes on hands की पॉलिसी बनाई।

इस पॉलिसी का मतलब था की अगर कोई कुदरती आफत इस आइसलैंड पर आती है तो भारत सरकार इन लोगो की हमेशा मदद करेगी।

2006 में दो लोकल फिशर मैन जब गलती से इस आइसलैंड के करीब चले गए तो आइसलैंड के लोगो ने उसे मार दिया। 

इसके बाद भारत सरकार ने इस आइसलैंड से 5KM दूर रहने का कानून बनाया।

सबसे आखरी कोशिश

नवंबर 2018 में जॉन एलन चाउ नाम के एक 26 साल के अमेरिकन मिशनरी फैसला करते हैं कि वह कानून का भंग करके इंडिया के नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड पर जाएंगे। 

इस आइलैंड पर रहने वाले लोगों को हम “नॉर्थ सेन्टिनेलेस ट्राइब” का हिस्सा मानते हैं और ये शायद दुनिया की आखिरी अन कॉन्टैक्ट प्राइम। यानि कि वे बाहर की दुनिया के बारे में और कुछ नहीं पता है।

 जॉन एक क्रिश्चियन हैं और ये इस हद तक ऑब्सेस्ड हो चुके अपने धर्म से की इस आयलैंड पर रहने वाले लोगों को क्रिश्चियनिटी का पाठ पढ़ाना चाहते थे। 

तो ये पास वाले आइलैंड पर पहुंचकर वहां मौजूद एक लोकल मछुवारे को ₹25,000 की रिश्वत देते है । और उसे कन्विन्स कर लेते हैं कि वो उन्हें इस आइलैंड पर छोड़कर आये।

आपको बता दे की भारत सरकार ने इस आइसलैंड पर जाने से बैन लगा दिया है।

जॉन एलन चाउ 14 नवंबर 2018 की रात को ये इस आइसलैंड जाने के लिए निकलते हैं ताकि अंधेरे में कोस्ट गार्ड्स इन्हें ना देख सके।

वह अपने साथ एक कैमरा, मछली और एक बायबल की किताब लेकर जाते है ताकि वह वहा के लोगो को गिफ्ट दे सके।

15 नवंबर की सुबह जैसे ही उस आइलैंड के करीब पहुंचते हैं। उस लोकल मछुवारे से कहते हैं कि वो दूर ही वेट करेंगे। वह अपनी छोटी नाव को लेकर उस आइसलैंड के ज्यादा करीब चले जाते है।   

पास पहुंचते ही इन्हें घर दिखता है और कुछ औरतों के बात करने की आवाज आती है कि वह अपनी नाव को बीच पर खड़ी करने के लिए तैयार करते हैं कि इन्हें तभी दिखता है की 1 से 2 आदमी अपने हाथ में तीर ओर भाला लेकर उनके सामने अचानक आते है । जॉन उन्हें देखकर कहते हैं माई नेम इज जॉन। i love you and jesus loves you

 वो दो आदमी तीर से उन पर अलमोस्ट रेडी हो जाते है हमले के लिए लेकिन ऐसा देखते ही जौन अपनी नाव में वापस मुड़ जाते हैं। 

कुछ घंटे बाद जॉन दोबारा से कोशिश करते हैं। इस बार ये नॉर्थ साइड जाते है उन्हे दूर से दिखता है की जमीन पर मौजूद करीब छह सेंट रिलीज लोग इनकी तरफ देखकर चिल्ला रहे हैं और कुछ बोलने लगे। लेकिन इसकी भाषा जोन को समझ नही आती और वह भी उनके जैसे इशारे करने लगते है। ऐसा देखते ही वहा के लोग हंसने लगते है। 

जैसे ही वह उस आइसलैंड पर जाते है तो वह दो बच्चे को देखते है और वह उनसे बात करने की कोशिश करते है

लेकिन जैसे ही वह उस बच्चे से बात करने की शुरुआत करता है चुपके के से जंगल से एक बड़ा आदमी बाहर आता है और पीछे से उनकी नाव को चुरा लेता है। बच्चे के हाथ में हथियार होते है और वह जॉन पर हमला करते है। लेकिन वह इस हमले से बच जाते है। और समुद्र में चले जाते है। वह कैसे भी करके अपनी बड़ी बोट के पास पहुंचते है और वह वहा से चले जाते है।

लेकिन कुछ दिनों के बाद जॉन वापिस इस आइसलैंड पर आते है और वह इस बार फुटबॉल और कुछ खाने की चीजों को अपने साथ लेकर जाते है। 

लेकिन जैसे ही वह उस आइसलैंड पर जाते है तो मछुवारे को दूर से दिखता है की वहा के लोग किसी इंसान को लेकर जा रहे है और रेत में दफना रहे होते है। वह इंसान कोई और नही बल्कि जॉन ही था। क्यों की मछुवारा उनके कपड़े पहेचान लेता है।

हम जो बात कर रहे है वह एक रीयल स्टोरी है और यह स्टोरी है नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड (north sentinel island) की।

चलिए जानते है इस आइसलैंड लैंड के बारेमे।